Poetry 1 min read 186.6K reads

गलियाँ


शहर वही हैगलियाँ वही हैंलेकिन अब वोबात नहीं है

दर्द वही हैमर्ज़ वही हैलेकिन अब भीकाट नहीं है

वक्त वही हैमैं वही हूँपर पहली सीधार नहीं है।

मं शर्मा( रज़ा)

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