शहर वही हैगलियाँ वही हैंलेकिन अब वोबात नहीं हैदर्द वही हैमर्ज़ वही हैलेकिन अब भीकाट नहीं हैवक्त वही हैमैं वही हूँपर पहली सीधार नहीं है।मं शर्मा( रज़ा)
शहर वही हैगलियाँ वही हैंलेकिन अब वोबात नहीं है
दर्द वही हैमर्ज़ वही हैलेकिन अब भीकाट नहीं है
वक्त वही हैमैं वही हूँपर पहली सीधार नहीं है।
मं शर्मा( रज़ा)