Poetry 1 min read 237.7K reads

गगन


गगन न माने कोई बंधनस्वतंत्र जीने को आजाद हैधरा बंधी है स्वधर्मों सेयही जीवन का आधार है ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more