Poetry 1 min read 617.3K reads

एक से चेहरे


मुखौटे पहने हुएएक से चेहरे मिलेएक जैसी सोच केमन के फरेबी मिलेचेहरों पर मुस्कानहाथों में खंजर मिलेफर्क नहीं ज़रा साचोर सब एक से मिलेआस्तीन के साँप सभीडसने को तैयार मिले।

मं शर्मा(रज़ा)

Read more Earn more Learn more