प्रारम्भ से अंत तकजन्म से मृत्यु तकमैंने एक सत्य को जीयामैं सदैव मेरे साथ रहाभीड़ की भूलभुलैया मेंमाया की गलबहियां मेंप्रलोभन की छाया सेमैं पाक साफ रहा।मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित
प्रारम्भ से अंत तकजन्म से मृत्यु तकमैंने एक सत्य को जीयामैं सदैव मेरे साथ रहा
भीड़ की भूलभुलैया मेंमाया की गलबहियां मेंप्रलोभन की छाया सेमैं पाक साफ रहा।
मं शर्मा( रज़ा)
#स्वरचित