करता हूँ तेरी इबादतबस एक नज़र को तेरीकुछ और नहीं है चाहतअब मत कर ज्यादा देरीले ले अपनी धन दौलतझोली सब्र से भर दे मेरीदरिया में रहकर प्यासा हूँबस प्यास बुझा दे मेरी।मं शर्मा (रज़ा)
करता हूँ तेरी इबादतबस एक नज़र को तेरीकुछ और नहीं है चाहतअब मत कर ज्यादा देरी
ले ले अपनी धन दौलतझोली सब्र से भर दे मेरीदरिया में रहकर प्यासा हूँबस प्यास बुझा दे मेरी।
मं शर्मा (रज़ा)