हर एक क्षण को जीकर देखाहर क्षण बहुत उदास लगामुझसे मिल खुश हुआ नहींखुद से भी नाराज़ लगा।चार दिन की जिंदगी थीफिर भी काटे न कटीएक एक क्षण सदी सा गुज़रादो दिन में तौबा की ।मं शर्मा (रज़ा)
हर एक क्षण को जीकर देखाहर क्षण बहुत उदास लगामुझसे मिल खुश हुआ नहींखुद से भी नाराज़ लगा।
चार दिन की जिंदगी थीफिर भी काटे न कटीएक एक क्षण सदी सा गुज़रादो दिन में तौबा की ।
मं शर्मा (रज़ा)