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एक जैसा


सुख में दुख मेंमिलन में विरह मेंपाने में खोने मेंएक जैसा भाव हैजीत और हार में

वीराने में कोलाहल मेंआशा में निराशा मेंकर्म में धर्म मेंएक जैसा भाव हैजीवन और मृत्यु में।

मं शर्मा( रज़ा)

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