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एक आश्रय


दीवारें बहुत खड़ी हुई अबसिर के ऊपर छत चाहिएसुख की छाया मिले जहाँऐसा एक आश्रय चाहिए

सौभाग्य से जीवन पाया हैजीने को अनुदान चाहिएमिट जाए थकान जीवन कीऐसा घर आँगन चाहिए।

मं शर्मा (रज़ा)

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