कभी लक्ष्मी कभी सरस्वतीबाबा मुझको कहते थेकभी मधु कभी मधुआकह कर लाड़ लड़ाते थेनिर्बल बेटी जानसीने में बोझ सा ढोते थेमुस्कानों में खौफ छिपा करदुर्गा मुझे बनाते थे ।मं शर्मा (रज़ा)
कभी लक्ष्मी कभी सरस्वतीबाबा मुझको कहते थेकभी मधु कभी मधुआकह कर लाड़ लड़ाते थे
निर्बल बेटी जानसीने में बोझ सा ढोते थेमुस्कानों में खौफ छिपा करदुर्गा मुझे बनाते थे ।
मं शर्मा (रज़ा)