मैं सफर पर निकल पड़ाजाने किस दिशा की ओरदिशा भी तो जानती हैजा रही है वो किस ओरअपनी दशा से अनभिज्ञपकड़ कर विश्वास का छोरचलता चला जा रहा हूँ मैंऔर किसी दुर्दशा की ओर ।मं शर्मा (रज़ा)
मैं सफर पर निकल पड़ाजाने किस दिशा की ओरदिशा भी तो जानती हैजा रही है वो किस ओर
अपनी दशा से अनभिज्ञपकड़ कर विश्वास का छोरचलता चला जा रहा हूँ मैंऔर किसी दुर्दशा की ओर ।
मं शर्मा (रज़ा)