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दुखदायी


दुख बड़ा दुखदायी हैकिसने पार पाई हैदर्द को रोता है क्यादर्द से होता है क्या

दर्द ही जीवन-सार हैजीने का आधार हैआँख में पानी न लापानी ने आग लगाई है।

मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित

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