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दुग्ध


ममता के तुमप्रथम पान होजीवन के तुमप्राणदान हो

जिह्वा का तुमप्रथम स्वाद होकोई निर्धनया धनवान हो

दुग्ध नहींतुम अमृत होउसकी अद्भुतनेमत हो ।

मं शर्मा (रज़ा)

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