दूर हों कि पास होंआम हों कि खास होंगिले हों कि शिकवे होंउलझे हों कि सुलझे होंये रिश्तों के बंधन जानेकिस डोर से बंधते हैंतोड़ने से टूटते नहींजोड़ने से जुड़ते नहीं ।मं शर्मा (रज़ा)
दूर हों कि पास होंआम हों कि खास होंगिले हों कि शिकवे होंउलझे हों कि सुलझे होंये रिश्तों के बंधन जानेकिस डोर से बंधते हैंतोड़ने से टूटते नहींजोड़ने से जुड़ते नहीं ।
मं शर्मा (रज़ा)