यौवन की दोपहरी मेंतन से महकता चंदनसुहागन की बिंदियामाथे पे दमकता कुंदनपायल की रूनझुन संगचलती फिरती सी नज़्मलहरों के सुर में गुनगुनातीमानो सागर की सरगम ।मं शर्मा (रज़ा)
यौवन की दोपहरी मेंतन से महकता चंदनसुहागन की बिंदियामाथे पे दमकता कुंदन
पायल की रूनझुन संगचलती फिरती सी नज़्मलहरों के सुर में गुनगुनातीमानो सागर की सरगम ।
मं शर्मा (रज़ा)