मेरी मौजूदगी का उसको ऐहतराम न थावरना जिंदगी से कोई नाराजगी नहीं थीखुदा की बंदगी में फिर कुछ सुकून थाजिंदगी से निभाना दिल्लगी नहीं थी।मं शर्मा (रज़ा)
मेरी मौजूदगी का उसको ऐहतराम न थावरना जिंदगी से कोई नाराजगी नहीं थीखुदा की बंदगी में फिर कुछ सुकून थाजिंदगी से निभाना दिल्लगी नहीं थी।
मं शर्मा (रज़ा)