Poetry 1 min read 1 reads

धुंधलका


धुंधला धुंधला सा धुंधलकाआँखें मिचमिचाता उजाला हैरात से दिन के मिलन का मुहूर्तउठ जाग मुसाफिर होने वाला है।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more