Poetry 1 min read 382.9K reads

ढाँचा


ढाँचा हूँ पुरानी इमारत कादर-ओ दीवार ये कहती हैजिस्म फना हो जाएँ चाहेरूह तो जिंदा रहती है।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more