दिल खोलके कहते थे मन की बात
कागज़ पर उतार देते थे जज़बात
खुशी का पैगाम हो कि ग़म की गाज
बेसब्री से होता था डाकिए का इंतज़ार
घेर लेती डाकिए को पूरी पलटन
खत पाकर बढ़ती दिल की धड़कन
अब रहा नहीं खत लिखने का चलन
समय के साथ बदल गया जीवन ।
मं शर्मा( रज़ा)

दिल खोलके कहते थे मन की बात
कागज़ पर उतार देते थे जज़बात
खुशी का पैगाम हो कि ग़म की गाज
बेसब्री से होता था डाकिए का इंतज़ार
घेर लेती डाकिए को पूरी पलटन
खत पाकर बढ़ती दिल की धड़कन
अब रहा नहीं खत लिखने का चलन
समय के साथ बदल गया जीवन ।
मं शर्मा( रज़ा)