कभी मुहब्बत कर रहा हैकभी अदावत कर रहा हैन जाने किस तरह कीगफलत में जी रहा है आदमीकभी इबादत कर रहा हैकभी जकात कर रहा हैन जाने किस तरह कीदहशत में जी रहा है आदमी।मं शर्मा( रज़ा)
कभी मुहब्बत कर रहा हैकभी अदावत कर रहा हैन जाने किस तरह कीगफलत में जी रहा है आदमी
कभी इबादत कर रहा हैकभी जकात कर रहा हैन जाने किस तरह कीदहशत में जी रहा है आदमी।
मं शर्मा( रज़ा)