मोहब्बत थीथोड़ी नहींबेहद थीदरमियांकोई दीवारकोई सरहद न थीफासले क्यों हुएनामालूमवक्त ने शायद चुगली की थी।मं शर्मा (रज़ा)
मोहब्बत थीथोड़ी नहींबेहद थी
दरमियांकोई दीवारकोई सरहद न थी
फासले क्यों हुएनामालूमवक्त ने शायद चुगली की थी।
मं शर्मा (रज़ा)