ये कैसी नादानी तेरीये कैसा प्रतिकार हैमत कर उत्पात प्राणीचार दिन का दरबार हैह्रदय को शांत करव्यर्थ ये चीत्कार हैतेरी व्यथा कौन सुनेगाबाहर भी हाहाकार है ।मं शर्मा(रज़ा)
ये कैसी नादानी तेरीये कैसा प्रतिकार हैमत कर उत्पात प्राणीचार दिन का दरबार है
ह्रदय को शांत करव्यर्थ ये चीत्कार हैतेरी व्यथा कौन सुनेगाबाहर भी हाहाकार है ।
मं शर्मा(रज़ा)