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चिठ्ठी


अपनों के परायों केसुखों का दुखों कासंदेशा इसमें समाया हैये पत्र जो आज आया है

बाजे गाजे की थाप कहींमातम की शहनाई बजाया हैखुशी का गुलदस्ता नहींआँखों की नमी भी लाया है

ये पत्र जो आज आया है।मं शर्मा(रज़ा)

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