भरी आँधियों में चिंगारी सुलगाने वालेहवाओं के रूख की पहले पहचान कर लेमेरे किरदार की बखिया उधेड़ने चला हैअपने ज़मीर के पैरहन की मरम्मत तो करले।मं शर्मा (रज़ा)
भरी आँधियों में चिंगारी सुलगाने वालेहवाओं के रूख की पहले पहचान कर ले
मेरे किरदार की बखिया उधेड़ने चला हैअपने ज़मीर के पैरहन की मरम्मत तो करले।
मं शर्मा (रज़ा)