दीया नहीं जो जलती रहूँगीचिंगारी हूँ जला भी सकती हूँमं शर्मा( रज़ा)
दीया नहीं जो जलती रहूँगीचिंगारी हूँ जला भी सकती हूँ
मं शर्मा( रज़ा)