वो और होंगेतेरी छुअन से जी उठने वालेमैं ढहती दीवार हूँछूने से बिखर जाऊँगा।मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित
वो और होंगेतेरी छुअन से जी उठने वालेमैं ढहती दीवार हूँछूने से बिखर जाऊँगा।
मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित