नयनों में बसते हैं आँसूतेरी छवि कैसे बसा लूँधुँधलाई सी छवि तुम्हारीनजर भर के कैसे देखूँ।मं शर्मा (रज़ा)
नयनों में बसते हैं आँसूतेरी छवि कैसे बसा लूँधुँधलाई सी छवि तुम्हारीनजर भर के कैसे देखूँ।
मं शर्मा (रज़ा)