तपती धूपझुलसते पाँवमैं जा बैठापेड़ की छाँवबबूल था वोधूप का माराखुद माँग रहाथोड़ी सी छाँव।मं शर्मा (रज़ा)
तपती धूपझुलसते पाँवमैं जा बैठापेड़ की छाँव
बबूल था वोधूप का माराखुद माँग रहाथोड़ी सी छाँव।मं शर्मा (रज़ा)