Poetry 1 min read 623K reads

चौराहे


⁸इन काली बलखातीघुमावदार सड़कों केमनहूस चौराहे हैंकदम कदम पे जहाँकाल मुँहबाये खड़े हैं

होशियार रहो जब भीसड़कों पर निकलोहर कदम पर यहाँमौत के सौदागरमरघट के हमराह खड़े हैं।

मं शर्मा(रज़ा)

Read more Earn more Learn more