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चाशनी


झूठ की चाशनी मेंज़हरीली तासीर थीदिखावा रहने देतेहकीकत ही ठीक थी

माफ करना मुझसेवो देखा नहीं गयाजिस्म सितारों से सजारूह फटेहाल थी ।

मं शर्मा( रज़ा)

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