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चंद्रमुखी


चाँद से मुखड़े परलहराती हुई ज़ुल्फेंसपेरे की धुन परथिरकती सी सर्पिनें

छिप जाए चंद्रमुखज़ुल्फों के साये मेंधरती भी डूब जाएगहरे अंधेरों में।

मं शर्मा( रज़ा)

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