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चाल ढाल


चाल ढाल है बदली बदलीरंग रूप भी ढला ढलाबोल मुसाफिर किसने पथ मेंतेरी हिम्मत को छला

किस बाधा ने रस्ता रोकाकिस आँधी ने दी मशाल बुझाअकेला नहीं था तू सफर मेंतेरे पीछे पीछे हुजूम चला ।

मं शर्मा(रज़ा)

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