सुगंध होता तोबिखर जाता चहुँओरघटा होता तोबरस जाता घनघोरलहर होता तोपहुँच जाता उस छोरसूरज होता तोनित लाता सुनहरी भोरप्रारब्ध होता तोहाथों में रखता अपनी डोर।मं शर्मा (रज़ा)
सुगंध होता तोबिखर जाता चहुँओरघटा होता तोबरस जाता घनघोरलहर होता तोपहुँच जाता उस छोरसूरज होता तोनित लाता सुनहरी भोरप्रारब्ध होता तोहाथों में रखता अपनी डोर।
मं शर्मा (रज़ा)