Poetry 1 min read 255.2K reads

चहुँओर


सुगंध होता तोबिखर जाता चहुँओरघटा होता तोबरस जाता घनघोरलहर होता तोपहुँच जाता उस छोरसूरज होता तोनित लाता सुनहरी भोरप्रारब्ध होता तोहाथों में रखता अपनी डोर।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more