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ब्याहता


धरा जैसा धीरज धारेसंस्कारों का बोझ संभालेनवजीवन में प्रवेश करतीनई ब्याहता मंद मंद मुस्काए

तू बेटी तू बहना थी पहलेअब पत्नी और माँ बनना हैतुझसे बहुत अपेक्षाएँ होंगीकुलवधू तुझे कुल चलाना है।

मं शर्मा (रज़ा)

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