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बूँद


बूँद होना चाहती हूँएक निर्मलनिश्च्छल बूँदपारदर्शी सीशीतल और तृप्त बूँद

विलुप्त होना चाहती हूँनभ मेंहवा मेंधरा में औरप्यासी क्षुधा में।

मं शर्मा (रज़ा)

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