बूँद बूँद को तरसा सावनबादल उड़ा ले गई पवनप्यासी रही धरती फिर सेमन रोया रहे नैना रीते ।मं शर्मा (रज़ा)
बूँद बूँद को तरसा सावनबादल उड़ा ले गई पवनप्यासी रही धरती फिर सेमन रोया रहे नैना रीते ।
मं शर्मा (रज़ा)