बिन कहे नज़्म लगीबयां हुई तो गज़ल लगीहर बात पे हुआ यकींजब जिंदगी शायरी करने लगी।मं शर्मा (रज़ा)
बिन कहे नज़्म लगीबयां हुई तो गज़ल लगीहर बात पे हुआ यकींजब जिंदगी शायरी करने लगी।
मं शर्मा (रज़ा)