दूर था मजबूर थामैं तमाशबीन थाआज अपनों के बीच मेंतमाशा हो गया हूँवक्त वक्त की बात हैसमय की बिसात हैकल की बात और थीआज प्यादा रह गया हूँ ।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
दूर था मजबूर थामैं तमाशबीन थाआज अपनों के बीच मेंतमाशा हो गया हूँ
वक्त वक्त की बात हैसमय की बिसात हैकल की बात और थीआज प्यादा रह गया हूँ ।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित