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बीनाई


मेरी बीनाई के दायरे में रहा करयूँ भी तेरे सिवा कुछ दिखता नहींवक्त का मिजाज़ बदल जाए चाहेयादों से तुझको छीन सकता नहीं।

मं शर्मा (रज़ा)

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