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बिन बरसे


बूँद बूँद पानी को तरसेधरती पर आग सी बरसेत्राहि माम कहते नहीं थकतेसबके प्राण हलक में अटके

बिन पानी प्यास न मरतीबिन बरसे आग न बुझतीवर्षा से धरती जी उठतीजीवन को रफ्तार मिलती।मं शर्मा (रज़ा)

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