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भोली


माँ भोली धरती थीपिता सशक्त छतदोनों ने मिलकरबनाया था एक घर

माँ की लोरियों सेजब गूँजने लगा घरधरती पर मानोउतर आया था स्वर्ग।

मं शर्मा (रज़ा)

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