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भीड़


भीड़ का कोईचेहरा नहीं हैभीड़ की नीयतस्पष्ट नहीं है

भीड़ में हैं कईमासूम चेहरेकुछ की नीयतठीक नहीं है

सोच समझ करभीड़ को समझनागेहूँ संग घुनपिस न जाए कहीं ।

मं शर्मा (रज़ा)

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