राहें राह भटक गई हैं

राह पे ला देगो क्या

मंजिल खोई है कहीं

ढूँढ के ला दोगे क्या


अपने कुछ रूठ गए हैं

मनवा दोगे क्या

दिल में कई मलाल हैं

मिटवा दोगे क्या


बिगड़ गई है तस्वीर

संवार दोगे क्या

मन में कई सवाल हैं

जवाब दोगे क्या।



मं शर्मा (रज़ा)