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बेनाम रिश्ते


घनघोर अंधेरा यादों काजब से जीवन में छाया हैमैं आँखें मींचे बैठा हूँइसने बहुत डराया है

यादों की भूलभुलैंया सेकौन निकल पाया हैबेनाम रिश्तों के सायों नेजीवन भर उलझाया है ।

मं शर्मा( रज़ा)

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