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बेलिबास


कदम कदम पर काँटों कीबिछी हुई कालीन मिलीखुशियाँ ढकी छिपी रहींबेबसी बे लिबास मिली

सूखे नीरस जीवन कोखुशियों की सौगात मिलीजिसका अंतस भीगा थाउसको ही बरसात मिली।

मं शर्मा (रज़ा)

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