फूल न बनाना मुझेख़ार ही कर देनागुलाब की पंखुड़ी सामिजाज़ अता करनासह लूँगा दर्द मैंबेइंतिहाई की हद तकतकलीफ से किसीऔर कीगुजरने को न कहना।मं शर्मा( रज़ा)
फूल न बनाना मुझेख़ार ही कर देनागुलाब की पंखुड़ी सामिजाज़ अता करना
सह लूँगा दर्द मैंबेइंतिहाई की हद तकतकलीफ से किसीऔर कीगुजरने को न कहना।
मं शर्मा( रज़ा)