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बेहद


घर से निकले हैंपहुँच भी जाएंगेप्रयासरत हैंपा भी जाएंगे

बेहद अल्हड़ हैंगंभीर हो जाएंगेअभी नदी हैंसागर भी हो जाएंगे।

मं शर्मा (रज़ा)

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