कहीं मस्ती कहीं उमंगकहीं खुशियों के मृदंगकहीं हाड़ गलाती रह गईबेदर्द दिसम्बर की ठंडठंडे पड़ गए अलावसुलगाए सीले पुआलधीमी जीवन की चालकिया सर्दी ने बुरा हाल।मं शर्मा (रज़ा)
कहीं मस्ती कहीं उमंगकहीं खुशियों के मृदंगकहीं हाड़ गलाती रह गईबेदर्द दिसम्बर की ठंड
ठंडे पड़ गए अलावसुलगाए सीले पुआलधीमी जीवन की चालकिया सर्दी ने बुरा हाल।
मं शर्मा (रज़ा)