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बेबसी


हर शख्स अभागा लगाअपने ग़मों से भागा लगाबेबसी का आलम तो देखोहर कोई सुख से अंजाना लगा

उसने सबको सब दिया हैदर्द भी तोहफे में मिला हैसागर को फिर क्या गिला हैचट्टानों पे सिर पटक रहा है।

मं शर्मा (रज़ा)

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