अपनों का साथ और
चाय पर गुज़र है
कब हुई सुबह
कब ढली दोपहर है
जीवन की रफ्तार पे
ठंड की जकड़ है
बर्फीली हवा ने तोड़ी
धूप की कमर है
बालक और वृद्धों पे
ठंड का असर है
उस पर ये बारिश
कहर है कहर है ।
मं शर्मा (रज़ा)

अपनों का साथ और
चाय पर गुज़र है
कब हुई सुबह
कब ढली दोपहर है
जीवन की रफ्तार पे
ठंड की जकड़ है
बर्फीली हवा ने तोड़ी
धूप की कमर है
बालक और वृद्धों पे
ठंड का असर है
उस पर ये बारिश
कहर है कहर है ।
मं शर्मा (रज़ा)