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बरसातें


चल रहा समय का पहियासिमट रहा है फिर दरियाबदल जाएंगे फिर मौसमक्यों खोता है तू दम खम

फिर दोहराएंगी बरसातेंभर भर लाएंगी सौगातेंआज कम कल ज्यादा हैआँसू बहाने का क्या फायदा है ।

मं शर्मा( रज़ा)

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